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बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

निगाहें उसे नहीं पा सकतीं, बल्कि वही निगाहों को पा लेता है। वह अत्यन्त सूक्ष्म (एवं सूक्ष्मदर्शी), ख़बर रखने वाला है

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 103

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🔘 हदीस न-41 🔘

 

हज़रत अबू मूसा अश्अरी रज़ी़़ बयान करते हैं कि अल्लाह के रसूल सल़़ ने फरमाया: "सोना (Gold) और रेशम -पहनना- मेरी उम्मत के महिलाओं के लिए हलाल (जाएज़) किया गया है, और पुरुषों पर हराम (नाजाएज़) किया गया है।"

सुनन नसई 5148

 

(एै संदेष्टा! उन लोगों से कहिए कि) तुम्हारे पास तुम्हारे पालनहार की ओर से आँख खोल देने वाले प्रमाण आ चुके हैं। अब जो व्यक्ती आँखे खोल कर देखे गा वह अपना ही भला करेगा, और जो व्यक्ती अंधा बन जाएगा वह अपना ही नुक़सान करेगा। और मुझे तुम्हारी रक्षा की ज़िम्मेदारी नहीं सौंपी गई है।

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 104

 

नोट: किसी को ज़बरदस्ती मुसलमान बना कर जहन्नम से उस की रक्षा नहीं की जा सकती। मुसलमान की ज़िम्मेदारी बस ये है कि वह काफिरों तक अल्लाह के आदेश पहुँचा दे।

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🔘 हदीस न-42 🔘

 

हज़रत उम्मे फज़्ल कहती हैं कि "नबी करीम सल़़ मेरे घर में थे, तभी एक देहाती आया और उस ने कहा: मेरी एक पत्नी थी, अब दूसरी महिला से (भी)शादी कर लिया हूँ। तो मेरी पहली पत्नी ने ये दावा कर दिया है कि उस ने मेरी दूसरी पत्नी को (बचपन में) एक या दो घूँट दूध पिलाया है! तो आप सल़़ ने फरमाया: "एक या दो घूँट से रज़ाअत (दूध पिलाने का मसला) साबित नहीं होती।"

सहीह मुस्लिम 1451

 

नोट: इस्लाम में चार शादी की इजाज़त है परन्तु दो बहनों से एक साथ या माँ बेटी इत्यादी से एक साथ निकाह करना हराम है, दूसरी से निकाह करने पर निकाह नहीं होगा। दूध पीने पिलाने से भी माँ बेटी और बहन का रिश्ता बन जाता है इस लिए दो दूधिया बहनों या दो दुधिया माँ बेटी से भी एक साथ शादी हराम है। हदीस में है कि पहली पत्नी ने दूसरी के बारे में दावा किया था कि वह मेरी दुधिया बेटी है।

और इसी प्रकार हम अपनी आयतें विभिन्न ढंग से बयान करते है (ताकि आप उन्हें लोगों तक पहुँचा दें।) और आखिर में वे यूँ कहें कि: "(ऐ मुहम्मद!) आप ने कहीं से पढ़-पढ़ा लिया है।" और जो लोग जानना चाहें, हम उन के लिए सत्य को स्पष्ट कर दें। ۞ (एै संदेष्टा!) आप पर आप के पालनहार की ओर से जो वह्य भेजी गई है, आप उसी का पालन करिए -उस (अल्लाह) के सिवा कोई पूज्य नहीं है- और शिर्क करने वालों से बे परवाह हो जाइए। ۞

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 105-106

 

नोट: मुश्रिक हमेशा से इस्लाम के दुश्मन रहें हैं। यदि कोई सोचता है कि वह अपनी अच्छ़ाई से उन को खुश कर लेगा तो ये उस की भूल है। वह बस उसी समय खुश हो सकते हैं जब हम उन के साथ साथ शिर्क के कामों में भाग लेने लगें, और ये ना मुम्किन है। इस लिए उन्हें खुश करने के चक्कर में अपनी आखिरत नहीं बर्बाद करनी चाहिए। मुसलमान वर्षों से सोच रहे हैं कि वह उन को खुश कर लेंगे और समय समय पर गलत काम करके उन को खुश करने की कोशिश करते रहे है परन्तु वह नहीं हुए और लगातार इस्लाम दुश्मनी में आहे बढ़ते रहे। आज ये नौबत आगई है कि मुसलामन दिया जला कर उन को खुश करेंगे और शिर्क करने वाला बनना चाहेंगे। शायद इस से वह खुश हो जाएँ लेकिन इस खुशी का कया फायदा जब उन का पैदा करने वाला अल्लाह इस काम के कारण उन से नाराज़ हो जाएगा।

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🔘 हदीस न-43 🔘

 

हज़रत अबू हुरैरह रज़ी़़ से बयान है कि रसूल सल़़ ने फरमाया: हलाक व बर्बाद करने वाली चीज़ों से बचो; मतलब अल्लाह के साथ शिर्क करने और जादू टोना करने कराने से!"

सहीह बुखारी 5764

 

नोट: अल्लाह के साथ शिर्क करना एैसा बड़ा गुनाह है कि शिर्क की हालत में मरने वाले के लिए कोई माफी नहीं है। ये बात याद रखना चाहिए कि गैर मुस्लिमों के अक़ीदे से जुड़ी चीज़े भी शिर्क का हिस्सा हैं जैसे दिया जला कर और संख फूंक कर जिवाणूँ (virus etc) मारने का अक़ीदा इत्यादी। यदि कोई मुसलमान उन के अक़ीदे को अपना कर ये कार्य करता है तो वह शिर्क करने वाला होगा, और यदी कोई सच्चाई जानते बूझते केवल भाई चारे में ये काम करे गा तब ये शिर्क तो नहीं होगा परन्तु शिर्क के काम में मदद करना होगा। और ये भी बड़ा गुनाह है।

 

और यदि अल्लाह चाहता तो ये लोग शिर्क ना करते। हम (अल्लाह) ने ना तम्हें उन का संरक्षक नियुक्त किया है और ना तुम उन कामों के ज़िम्मेदार हो।

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 107

 

नोट: अल्लाह ने किसी को इस्लाम क़ुबूल करने पर मजबूर नहीं किया है उस ने सब को बुद्धी देकर आज़माने के लिए दुनिया में आज़ाद छ़ोड़ दिया है। (2) मुसलमानों का काम बस ये है रि वह मुश्रिकों तक सच्चाई/इस्लाम पहुँचा दें। उन का हाथ पकड़ कर शिर्क से रोकने की ज़िम्मेदारी नगी दी गई है। यदि कोई बुद्धिमान होगा तो वह खुद ही अल्लाह के संदेश को समझे गा और शिर्क करना छ़ोड़ देगा।

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🔘 हदीस न-44 🔘

 

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ी़़ कहते हैं: रसूल सल़़ से पूछ़ा गया: हम (मुसलमान) अच्छ़ाई की दावत देना और बुराई से रोकना कब छ़ोड़ देंगे? आप सल़़ ने उत्तर दिया: "जब तुम में भी वही सब बुराइयाँ फैल जाएँ जो यहूदियों में फैल गई थीं; जब तुम्हारे बड़ों में ज़िना आम हो जाए, हुकूमत बुद्धी हीनों के क़ब्ज़े मे चली जाए, और ज्ञान वाले दुनिया दार हो जाएँ।"

मुसनदे अहमद 12943

 

नोट: आज यही सब हो रहा है। इसी लिए ना तो मुसलमान अच्छाई की ओर बुलाते हैं ना बुराई से रोकते हैं। और यदि कोई रोकता है तो दुनिया परस्त ज्ञान वाले उसी के खिलाफ बोलने लगते हैं और बहाने बनाने लगते हैं।

 

(मुसलमानो!) जिन (झूठे भगवानों) को ये लोग अल्लाह के बजाए पुकारते हैं तुम उन को बुरा ना कहो, एैसा ना हो कि वे हद से आगे बढ़ कर अज्ञान वश में अल्लाह को बुरा कहने लगें। (इस दुनिया में तो) हम ने इसी प्रकार हर गिरोह के लिए उस के क्रम को सुहावना बना रखा है। फिर उन सब को अपने पालनहार की ओर लौटना है। उस समय वह उन्हें बताए गा कि वे कया कुछ़ किया करते थे।

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 108

 

नोट: दूसरे धर्मों के भगवानों को अप शब्द कहने से मना किया गया है। परन्तु इस का मतलब ये नही कि मुश्रिकों और काफिरों के शिर्क और बुरे कामों को गलत ना कहा जाए।

 

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🔘 हदीस न-45 🔘

 

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ी़़ से बयान है कि: "जब अल्लाह के रसूल सल़़ बच्चों के पास से गुज़रते तो उन को सलाम करते।"

सहीह मुस्लिम 2168

और उन लोगों ने बड़ी ज़ोरदार क़समें खाई हैं कि यदि उन के पास सच मुच कोई निशानी (मतलब चमत्कार) आजाए तो वे उस पर अवश्य ईमान लाएँगे। उन से कहिए कि: सारी निशानियाँ अल्लाह के क़ब्ज़े में हैं। और मुसलमानो तुम्हें कया पता कि यदि वह (चमत्कार) आ भी गए तब भी ये ईमान नहीं लाएँगे। ۞ जिस प्रकार ये लोग पहली बार (क़ुरान जैसे चमत्कार पर) ईमान नहीं लाए, हम (अल्लाह) भी उन (की ज़िद के कारण) उन के दिलों और निगाहों को मोड़ देते हैं और उन को इस हाल में छ़ोड़ देते हैं कि वे अपनी सरकशी में भटकते फिरें। ۞

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 109-110

 

नोट: इस आयत से मालूम होता है कि जो लोग खुली निशानियाँ देख कर भी सीधे रास्ते पर नहीं आते तो उन के नसीब में अल्लाह की ओर से भटकना लिख दिया जाता है। मुसलमानों के लिए इस में सोचने की बात ये है कि वे बहुत वर्षों से निशानियाँ देखने के बाद भी अल्लाह के रास्ते पर नहीं आरहे, तो उन को शायद इसी जुर्म में गुमराही में पड़ा रहने के लिए छ़ोड़ दिया गया है।

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🔘 हदीस न-46 🔘

 

हज़रत अबु मूसा अशअरी रज़़ी़़ से बयान है कि अल्लाह के रसूल सल़़ ने फरमाया:  अल्लाह तआला 15वीं शअबान की रात (शबे बराअत) में अपने बन्दों पर रहमत की नज़र डालता है तो शिर्क करने वाले और हसद रखने वाले को छ़ोड़ कर तमाम बन्दों को माफ कर देता।

सुनन इब्ने माजा: 1390

 

और यदि हम उन के पास फरिश्ते भेज देते, और मुर्दे उन से बातें करने लगते, और (उन की मांगी हुई) हर चीज़ हम खुली आँखों उन के सामने लाकर रख देते, तब भी ये ईमान लाने वाले नहीं थे। मगर ये कि अल्लाह ही चाहता (कि उन्हें ज़बरदस्ती ईमान लाने पर मजबूर करदे तो अलग बात होती।) लेकिन उन में से अधिकतर लोग अज्ञानता की बातें करते हैं।

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 111

 

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🔘 हदीस न-47 🔘

 

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ी़़ कहते हैं कि रसूल सल़़ ने फरमाया: "जिस व्यक्ती में तीन खासियतें हों उस ने ईमान की मिठास और सुवाद पा लिया। 1- उस के नज़दीक़ अल्लाह और उसते रसूल दुनिया जहान से अधिक प्यारे हों। 2-अल्लाह ही के लिए किसी से मोहब्बत करता हो और अल्लाह ही के लिए किसी से नफरत करता हो। 3-अल्लाह के साथ शिर्क करने के मुक़ाबले में भड़कती हुई आग में कूद जाना उस के लिए आसान हो।

सुनन नसई: 4987

 

नोट: अल्लाह के लिए प्यार मतलब: यदि कोई अल्लाह के आदेशों का पालन करे, उस के हिसाब से चले तो उस से मोहब्बत रखें। अल्लाह के लिए नफरत मतलब: यदि कोई किसी मुसलमान से या इस्लाम से दुश्मनी रखे इस्लाम के कामों से नफरत करे तो उस से नफरत करें इत्यादी।

 

और (जिस प्रकार ये लोग अल्लाह के नबी से दुश्मनी कर रहे हैं) उसी प्रकार हम ने मनुष्यों और जिन्नातों में से शैतानों को प्रत्येक नबी के लिए दुश्मन पैदा किया। जो धोका देने के लिए एक दूसरे को चिकनी चपड़ी बातें सिखाते रहते थे। और यदि अल्लाह चाहता तो वे एैसा ना कर सकते। तो उन को उन की धोके बाज़ियों में पड़ा रहने दो। ۞ और (वे नबियों के दुश्मन धोकेबाज़ी की बातें इस लिए करते थे) ताकि जो लोग आखिरत पर ईमान नहीं रखते उन के दिल उस की ओर झुकें, और वे उन में मगन रहें। और वह सारे काम करें जो वे करने वाले थे।

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 112-113

 

नोट: आज मीडिया भी यही काम करता है। धोका देने के लिए झूठी खबरें चलाता है और काफिर मुश्रिक लोग उन पर भरोसा कर लेते हैं। मुसलमानों को उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। आज भारत में यदि कोई इस आयात का बिल्कुल सही उदाहरण है तो वह मीडिया है, वह झूठी खबरें चला कर मुसलमानों के खिलाफ माहौल बनाता है और लोग उन पर विश्वास कर के मुसलमानों के दुश्मन बन जाते हैं। अल्लाह ने बहुत पहले ही बता दिया है कि हर ज़माने में एैसे शैतान पैदा होते रहे हैं एैसे लोगों पर भरोसा नही करना चाहिए।

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🔘 हदीस न-48 🔘

 

हज़रत अबू हुरैरह रज़ी़़ से बयान है कि नबी करीम सल़़ ने फरमाया: *"जब तीन चीज़े निकल आएंगी तो ۞किसी एैसे व्यक्ती का (अल्लाह पर) ईमान लाना उसे कोई लाभ नहीं देगा, जो उस से पहले ईमान ना लाया हो, (आयत) ۞ 1- दज्जाल 2- दाब्बह (एैसा जानवर जो लोगों से बात करेगा) 3- सूरज का पश्चिम से निकल आना।"*

सुनन तिर्मिज़ी 3072

 

नोट: ये तीनों क़यामत की निशानियाँ हैं इन के सामने आने से पहले ही सारे गैर मुस्लिमों को शिर्क (कई भगवान मानना) और इंकार (अल्लाह को, उसकी निशानियोँ को झुठलाना) छ़ोड़ कर मुसलमान बन जाना चाहिए। वर्ना इन निशानियों के बाद कोई ईमान क़ुबूल नहीं होगा।

 

(एै संदेष्टा! उन लोगों से कहिए कि:) कया मै अल्लाह को छ़ोड़ कर किसी दूसरे को निर्णायक बनाऊँ, हालांकि उसी ने तुम्हारी ओर ये किताब उतारी है, जिस में सारे (विवादास्पद) मामलों का विवरण मौजूद है? और जिन लोगों को हम (अल्लाह) ने पहले किताब दिया था वे य़कीन से जानते हैं कि ये तुम्हारे पालनहार की ओर से हक़ के साथ उतारी गई है। तो तुम कदापि संदेह में ना पड़ना। ۞ और तुम्हारे पालनहार का कलाम (बात) सच्चाई और न्याय में मुकम्मल है। उस की बातों को कोई बदलने वाला नहीं है। वह हर बात सुनने वाला, हर बात जानने वाला है। ۞

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 114-115

 

नोट: हर मोमिन पर ज़रूरी है कि वह अपने झगड़ों इत्यादी में क़ुरान ही से फैसले करे, और कराए। यदि आप क़ुरान को फैसल (निर्णायक) मान लेंगे तो किसी और के आगे फैसले के लिए रोने धोने और ना इंसाफी से बच जाएंगे।

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🔘 हदीस न-49 🔘

 

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ी़़ कहते हैं कि नबी करीम सल़़ ने फरमाया: जो व्यक्ती अपने अमीर (Leader) की कोई एैसी बात देखे जो उसे पसंद ना हो वह उस पर सब्र कर ले/ धैर्य से काम ले (मुसलमानों के इत्तिहाद से खुद को अलग ना करे); कयोंकि जो व्यक्ती (इस्लामी) जमाअत/इत्तिहाद से एक बालिश्त/बित्ता भी अलग होकर मरेगा, तो वह जाहीलिय्यत की मौत होगी।"

सहीह बुखारी 7143

 

नोट: जमाअत और आपसी इत्तिहाद का इतना अधिक महत्व है कि उस से अलग रहने वाले के लिए ये बात तक कह दी गई है।

 

और यदि आप धर्ती पर बसने वाले अधिकतर लोगों के पीछ़े चलेंगे तो वे आप को अल्लाह के मार्ग से भटका देंगे। वे तो केवल अटकल के पीछ़े चलते हैं। और उन का काम केवल अटकल दौड़ाना ही है। ۞ निस्संदेह आप का पालनहार भली भांती जानता है कि कौन अपने रास्ते से भटक रहा है, और वही उन लोगों को भी भली भांती जानता है जो सही मार्ग पर हैं। ۞

(पवित्र क़ुरान) अल अनआम 116-117

 

नोट: इस्लाम अल्लाह का सीधा मार्ग है यदि हम उसे छ़ोड़ कर समाज के अधिकतर लोगों के पीछ़े चलने लग जाएँ तो गुमराह हो जाएँगे, जैसे आज हम गुमराह हो चुके हैं कयों कि हम अल्लाह के आदेश ना मान कर लिबरलिज़्म और सेकूलरिज़्म पर चलने लगे हैं।

 

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🔘 हदीस न-50 🔘

 

हज़रत अबू हुरैरह रज़ी़़ से बयान है कि: "जब नबी करीम सल़़ को छ़ींक आती तो आप अपने हांथो से या कपड़े से अपना चेहरा ढ़क लेते, और आवाज़ को धीमी कर लेते।"

सुनन तिर्मिज़ी 2745

 

नोट: आज डाक्टर कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए इस चीज़ की सलाह दे रहे हैं। हक़ीक़त ये है कि नबी करीम सल़़ की छ़ोटी छ़ोटी सुन्नतें भी इंसानों के लिए बहुत फायदे की चीज़े है।

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