Hindi Hadees | Hadith for Today | Hadees sharif in hindi | Beautiful hadees in hindi

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🔘 हदीस -11 🔘

 

हज़रत अबू बकरह रज़ी़़ से बयान है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जो मुसलमान किसी मुआहिद को बिना किसी जुर्म के क़त्ल करेगा, अल्लाह तआला उस के लिए जन्नत हराम कर देगा।"

सुनन दारमी 2546

 

नोट: मुआहिद: जिस के साथ कोई मुआहिदा/treaty हुआ हो।

🔘 हदीस -12 🔘

 

हज़रत मुजाशिअ सुलमी रज़ी़़ कहते हैं कि मै (फत्हे मक्का के बाद) नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आया ताकि हिजरत के लिए बैअत कर सकूँ। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: हिजरत का समय तो गुज़र गया, अब इस्लाम, (अत्याचार के खिलाफ) जिहाद,  और अच्छ़े कामो पर बैअत का समय है।

सहीह मुस्लिम 1863

 

🔘 हदीस -13 🔘

 

हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ी़़ कहते हैं कि जब नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मदीना आए उस समय मदीना वाले नाप तोल में डंडी मारा करते थे। तो अल्लाह तआला ने ये आयत उतारा: { وَيْلٌ لِلْمُطَفِّفِينَ } "नाप तोल में कमी करने वालों के लिए तबाही बर्बादी है!" उस के बाद वह लोग सही से नाप तोल करने लगे!"

सुनन इब्ने माजा 2223

नोट: आज भी नाप तोल में कमी करने को लोग मामूली गुनाह समझते हैं  हालांकि ये बड़ा गुनाह है।

🔘 हदीस -14 🔘

 

हज़रत अली रज़ी़़ से बयान है कि  रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "कोई भी व्यक्ती उस समय तक पक्का ईमान वाला नहीं हो सकता जब तक वह चार चीज़ों पर ईमान ना लाए; 1- वह गवाही दे कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है, 2- और मै (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) अल्लाह का संदेष्टा हूँ, मुझे अल्लाह ने सच्चाई के साथ भेजा है।, 3- मृत्यु और मृत्यु के बाद जीवित किए जाने पर ईमान लाए/विश्वास करे, 4- और तक़दीर पर ईमान रखे।"

सुनन तिर्मिज़ी 2145

 

🔘 हदीस -15 🔘

 

हज़रत अबू हुरैरह रज़ी़़ कहते हैं कि रसूल सल्लल्लाहू अलैही सल्लम ने फरमाया: (सब से मुकम्मल ईमान वाला मोमिन वह है जो सब से अच्छ़े अख़लाक़/शिष्टाचार वाला हो, और तुम में सब से अच्छ़ा वह है जो (शिष्टाचार में) अपनी महिलाओं के लिए अच्छ़ा हो)

सुनन तिर्मिज़ी 1162

🔘हदीस -16 🔘

हज़रत अबू हुरैरह रज़़ी़़ से बयान है कि एक दिन रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम लोगों के बीच थे तभी एक व्यक्ती चलता हुआ आया और पूछा: एै अल्लाह के संदेष्टा! ईमान कया है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: ईमान ये है कि तुम अल्लाह पर, उस के फरिश्तों पर, उस की किताबों पर, उस के संदेष्टाओं पर, उस की मुलाक़ात पर और आखिरत में दोबारा जीवित किए जाने पर विश्वास रखो!, उस ने पूछ़ा: एै अल्लाह के संदेष्टा! इस्लाम कया है? आप ने फरमाया: इस्लाम ये है कि तुम अल्लाह की इबादत करो, किसी को उस का साझी ना बनाओ, नमाज़ पढ़ो, जक़ात दो, और रमज़ान के रोज़े रखो। उस ने पूछ़ा: इहसान कया है? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: इहसान ये है कि तुम अल्लाह की इबादत एैसे करो जैसे तुम उसे देख रहे हो, और यदि तुम नहीं देख रहे तो वह तो तुम्हें देख ही रहा है। उस ने पूछ़ा क़यामत कब आएगी? आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: जिस से पूछ़ा जा रहा है वह पूछ़ने वाले से अधिक नहीं जानता! लेकिन मै तुम्हें उस की निशानियाँ बताता हूँ; जब महिला अपने मालिक को पैदा करे, ये कयामत की निशानी है, और जब नंगे रह कर बकरियाँ चराने वाले सरदार/लीडर बन जाएँ तो ये क़यामत की निशानी है। फिर वह आदमी चला गया। तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने कहा: उसे वापस लाओ, जब लोग उसे लाने गए तो वह गाएब हो चुका था। तोआप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: ये जिबरईल अस़़ थे, जो लोगों को दीन का ज्ञान सिखाने आए थे।"

सहीह बुखारी 4777

🔘 हदीस -17 🔘

 

हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रज़ी़़ कहते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "जिस मुसलमान ने किसी दूसरी क़ौम (समुदाय/धर्म) का (धार्मिक) तरीक़ा/रिवाज अपनाया वह उन्हीं में से होगया!"

सुनन अबु दाऊद 4031

 

नोट: हिन्दुओं/गैर मुस्लिमों की धार्मिक चीज़ों को अपनाना, उन में   हिस्सा लेना भी इसी में से है, जैसे होलिका जलाना, होली खेलना, इत्यादी। जो लोग एैसा करते हैं उन को तौबा कर के दोबारा कलिमा पढ़ना चाहिए।

 

🔘 हदीस -18 🔘

 

हज़रत आईशा रज़ी़़ बयान करती हैं कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से यमन में पी जाने वाली "बित्अ" शहद की नबीज़ के बारे में पूछ़ा गया तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया:*"हर वह पी जाने वाली चीज़ जिस में नशा हो (उस का पीना) हराम है।"*

सहीह बुखारी 5586

 

🔘 हदीस -19 🔘

 

हज़रत मआज़ बिन अनस रज़ी़़ से बयान है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने  फरमाया: "जिस ने किसी को कोई ईल्म सिखाया, उसे उस इल्म पर अमल करने वाले के बराबर सवाब मिलेगा, और अमल करने वाले के सवाब में कुछ़ कमी भी नहीं की जाए गी।"

सुनन इब्ने माजा 240

 

🔘 हदीस -20 🔘

 

अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया: "मुससमानों के बीच हर तरह की सुलह जाएज़ है, मगर एैसी सलह जाएज़ नही जो हराम को हलाल और हलाल को हराम कर दे। (इसी प्रकार) मुसलमान हर प्रकार की शर्तों के पाबंद हैं, परन्तू एैसी किसी शर्त के पाबंद नहीं जो हलाल को हराम और हराम को हलाल कर दे।

सुनन तिर्मिज़ी 1352

 

नोट: एैसी किसी शर्त की पाबंदी करना मुसलमान के लिए जाएज़ नहीं है जो हलाल को हराम या हराम को हलाल कर दे।

 

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