Wazu Karne Ka Tarika in Hindi | वज़ू करने का तरीका | Wazu Ki Dua In Hindi | Wazu Ka Tarika With Picture | वुजू की नियत

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    क्या आप इस ब्लॉग पर इसलिए आए हैं ही कि - वजू सीखना चाहते हैं  वजू का तारिका क्या है और वजू कैसे करें, तो आप सही जगह पर आए हैं। क्योंकि आप वजू क्या है, वजू करने का तारिका क्या है, वजू की नियत हिंदी में, वजू की दुआ हिंदी में, वजू के टूटने का कारण क्या है और वजू के बारे में और भी बहुत कुछ सीखने जा रहे हैं। तो आइए जानते हैं - 

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वुज़ू क्या है? What is Wudu :


वज़ू का अर्थ है: नमाज़ शुरू करने से पहले वुज़ू अपने आप को शुद्ध और स्वच्छ बनाने के लिए एक शारीरिक और मानसिक क्रिया है। यह शुद्धिकरण का एक आवश्यक धार्मिक कदम है जिसमें हाथ, मुंह, नाक, चेहरा, हाथ, सिर और पैर धोना शामिल है।

नमाज अदा करने से पहले हमें खुद को मानसिक, शारीरिक रूप से तैयार करने की जरूरत है। इस तैयारी का एक बड़ा हिस्सा वुज़ू के नाम से जाना जाता है। यह एक शुद्धिकरण प्रक्रिया है जिसे हर मुसलमान को नमाज़ अदा करने से पहले करना चाहिए।

यह नमाज़ का इतना महत्वपूर्ण हिस्सा है कि अगर कोई अज्ञानता या लापरवाही के कारण इसे छोड़ देता है, तो उसकी प्रार्थना अल्लाह ताला द्वारा स्वीकार नहीं की जाती है।


वुज़ू क्यों ज़रूरी है? –  Why is Wudu Important?


इस्लाम में पवित्रता और सफाई का बहुत महत्व है। वुज़ू नमाज़ से पहले शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की तैयारी है, और अल्लाह ताला से बात करने से पहले 'पाक' होना बहुत ज़रूरी है। इसके बिना पूजा शुरू नहीं हो सकती। वुज़ू के स्वास्थ्य लाभ इस तथ्य से साबित होते हैं कि नियमित रूप से हाथ और चेहरा धोने से बीमारियाँ और बीमारियाँ दूर हो जाती हैं।


वुज़ू कब ज़रूरी है? When is Wudu Required?

इस्लामिक नमाज़ दिन में 5 बार अदा की जाती है और जबकि प्रत्येक नमाज़ से पहले वुज़ू को दोहराना आवश्यक नहीं है, जब तक कि आपका वुज़ू टूट न जाए, इसे नए तरीके से जानें। गुप्तांगों से ठोस या तरल या हवा निकलने, जिसमें संभोग, खून बहना, उल्टी, सो जाना या कोई नशा करना शामिल है, से वुज़ू टूट जाता है या बातिल हो जाता है। फिर वुजू करना जरूरी हो जाता है।

वुजू की नियत

वुजू करने के लिए सबसे पहले आपको वुजू की नियत (Wazu ki Niyat) पढ़नी जरूरी है-

wazu se pahle ki dua या वजू की नियत के लिए इन तीनों में से किसी एक को भी पढ़ना जायज़ है :

  1. बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम , या
  2. बिस्मिल्लाहि वल हम्दु लिल्लाह  , या 
  3. बिस्मिल्लाहिल अलीय्यिल अजीम वलहम्दुलिल्लाहि अला दीनिल इस्लामि ।

 

Wazu Karne Ka Tarika 


पहला कदम यह समझना है कि आप वुज़ू की प्रक्रिया शुरू करने वाले हैं ताकि आप नमाज़ अदा कर सकें। यहां कहने के लिए कोई शब्द या विशेष कथन नहीं हैं। इरादा करना दिल और दिमाग की बात है। 


Wazu Ka Tarika With Picture | Step by Step Wazu Ka Tarika With Picture


Step 1 – बिस्मिल्लाह कहना (Say Bismillah)

यह वुज़ू बनाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे पहले कि हम अपने आप को धोना शुरू करें, हमें बिस्मिल्लाह (अल्लाह के नाम पर) कहना चाहिए। आप इसे चुपचाप अपने आप से कह सकते हैं।

say bismillah
Image Source: MyIslam.org

Step २ – तीन बार हाथ धोएं (Wash Your Hands Three Times)

पैगंबर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमें पहले अपने दाहिने हिस्से से शुरुआत करना सिखाया। इसका मतलब है कि आपको अपना दाहिना हाथ उंगलियों से कलाई तक तीन बार धोना होगा।

अपने दाहिने हाथ को धोने के लिए अपने बाएं हाथ का प्रयोग करें। ऐसा तीन बार करें। इसके बाद अपने बाएं हाथ को तीन बार धोने के लिए अपने दाहिने हाथ का उपयोग करें इसे भी तिन बार करे । अपनी उंगलियों के बीच और अपनी कलाई तक सभी तरह से धोना सुनिश्चित करें।

Wash Your Hands Three Times
Image Source: MyIslam.org

Step 3 – तिन बार कुल्ली करना (Rinse Your Mouth Three Times)

अपने दाहिने हाथ में थोड़ा पानी लें और अपने मुंह को तीन बार कुल्ला करें। अपने मुंह को ठीक से साफ करने के लिए इसे अच्छी तरह से करें।

Rinse Your Mouth Three Times
Image Source: MyIslam.org

Step 4 – नाक में तिन बार पानी डाले (Rinse your nose three times)

अपनी नाक को तीन बार धोएं। अपने दाहिने हाथ में धोड़ा पानी का उपयोग करें और इसे अपनी नाक में सूँघें। बिना बहुत अधिक लेने से आपका दम घुटता है। पानी को बाहर निकालने के लिए अपने बाएं हाथ का प्रयोग करें और इस प्रक्रिया को तीन बार दोहराएं।

वुज़ू के लिए अपनी नाक धोते समय यह ध्यान करना ज़रूरी है कि आप जिस पानी का उपयोग कर रहे हैं वह सुरक्षित है।

Rinse your nose three times
Image Source: MyIslam.org

Step ५ – चेहरा तिन बार धोए (Wash Your Face Three Times)

अपने हाथों में पानी लें और अपने माथे से शुरू करके अपना चेहरा धो लें, पानी को अपनी जॉ लाइन तक लाएँ और अपनी ठुड्डी पर समाप्त करें।

दाढ़ी रखना पैगंबर की सुन्नत है, अगर आपकी दाढ़ी के माध्यम से एक उंगली चलती है। अगर दाढ़ी पतली है तो उसे अच्छी तरह से धोया जा सकता है, नहीं तो मोटी दाढ़ी के लिए अपनी गीली उंगलियों को बालों में चलाएं ताकि गंदगी साफ हो जाए।

Wash Your Face Three Times
Image Source: MyIslam.org

Step 6 – हाथ को तिन बार धोए (Wash Your Arms Three Times)

सबसे पहले अपना दाहिना हाथ धोएं, उंगलियों से शुरू करें और अपने दाहिने हाथ को कोहनी तक तीन बार धोएं। पूरा हाथ गीला होना चाहिए, कोई सूखा हिस्सा नहीं छोड़ना चाहिए। इसके बाद अपने बाएं हाथ के लिए भी यही प्रक्रिया अपनाएं और इसे तीन बार करें।

Wash Your Arms Three Times
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wazu ka tarika images

washing your left arms
Image Source: MyIslam.org

Step 7 – सर का मसह करना (Clean your head)

थोड़ी मात्रा में पानी से सिर की सफाई करने के लिए इस क्रिया को ” मसह” के रूप में जाना जाता है। अपने गीले हाथों को माथे के ऊपर से सिर के पीछे और फिर सिर के पिछले हिस्से से माथे तक ले जाएं। यह केवल एक बार किया जाता है।

इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके बाल किस प्रकार के हैं। चाहे आप गंजे हों, छोटे बाल हों या लंबे बाल हों, प्रक्रिया समान है।

clean your head in wazu
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Step 8 – एक बार कान साफ करें (Clean your head)

अपने गीले हाथों का उपयोग करके आप अपनी तर्जनी का उपयोग अपने कानों के अंदर और अपने अंगूठे का उपयोग अपने कानों के पीछे के क्षेत्र को साफ करने के लिए करेंगे। यह केवल एक बार किया जाता है।

Clean Your Ears Once
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Step 9 – तिन बार पैर धोए (Wash Your Feet Three Times)

Wash Your Feet Three Times
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सबसे पहले अपने पैर की उंगलियों से अपने दाहिने पैर पर पानी बहाना शुरू करें और अपने टखने को धो लें। आपको यकीन होना चाहिए कि पानी दाहिने पैर के हर हिस्से को धो ले, खासकर पैर की उंगलियों और टखने के पिछले हिस्से के बीच। ऐसा तीन बार दाएं पैर से और तीन बार बाएं पैर से करें।

आप यह याद रखे की ऊपर जितने भी स्टेप बताया गया है उसके उसी स्टेप में wazu करना होगा नहीं तो आपका वजू नहीं होगा इसीलिए step by step wazu ka tarika सीखे और करे।

SUMMARY OF WUDU STEPS:

यहां step का summary दिया गया है। यह महत्वपूर्ण है कि इन step को याद किया जाए और हर step के बीच में बिना किसी लंबे वक़्त के इस क्रम में प्रदर्शन किया जाए।

  • Step 1 – बिस्मिल्लाह कहना (Say Bismillah)
  • Step 2 – तीन बार हाथ धोएं (Wash Your Hands Three Times)
  • Step 3 – तिन बार कुल्ली करना (Rinse Your Mouth Three Times)
  • Step 4 – नाक में तिन बार पानी डाले (Rinse your nose three times)
  • Step 5 – चेहरा तिन बार धोए (Wash Your Face Three Times)
  • Step 6 – हाथ को तिन बार धोए (Wash Your Arms Three Times)
  • Step 7 – सर का मसह करना (Clean your head)
  • Step 8 – एक बार कान साफ करें (Clean your head)
  • Step 9 – तिन बार पैर धोए (Wash Your Feet Three Times)

वजू की दुआ क्या है – Wazu ki dua

आपने अच्छी तरह से वजू कर लिया है तो अब जानते wazu ke baad ki dua क्या है, इससे पहले एक confusion समझ लेते है wazu ki pahle ki dua और wazu ke baad ki dua के बारे में क्युकी सिर्फ वजू के बाद की दुआ होता है वजू से पहले बिस्मिल्लाह पढ़ा जाता है क्युकी आप लोग गूगल में सर्च करते हो जैसे:

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Wazu ke Darmiyan ki Dua in Hindi

अगर आप wazu ke darmiyan padhne ki dua की तलाश कर रहे है तो आप की तलाश ख़तम हो गई कोई आपको यहाँ Wazu ke Darmiyan ki Dua in Hindi में निचे दिया है जिससे आप याद करके वजू करते समय पढ़ सकते हो।

wazu ke darmiyan ki dua
Image Source: tadeebulquran.com

वजू के बाद की दुआ क्या है – Wazu ke baad ki dua

लेकिन वजू के बाद की दुआ होता है तो चलिए जानते है wazu ke baad ki dua hindi में.

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wazu ke baad ki dua in hindi

अल्ला हुम्मज अलनी मिनत तव्वाबीना वजअलनी मिनल मुतह्हरीन ।

wazu ke baad ki dua in roman english

Allahummaj ‘alni minat-tawwabinawaj’alni minal-mutatahhirin.

wazu ke baad ki dua in urdu

اللھم مع النی منات التوابینا واج النی من المتحیرین۔

wazu ke baad ki dua with translation

ऐ अल्लाह! मुझे बहुत अधिक तौबा करने वालों में से बना दे और मुझे पाक-साफ़ रहने वालों में से बना दे।

औरतो के लिए वजू का तरीका – wazu ka tarika for ladies in hindi

औरतों के लिए वजू का तरीका वही जो मर्दों के लिए होता है जिसको अच्छी तरह और pictures के साथ ऊपर बताया गया है

और पढ़े : Ghusl ka Tarika

वुजू में कितने चीज़े फ़र्ज़ है? – Wazu me kitne farz hai

wazu ke faraiz कितने होते है वजू में चार चीज़े फ़र्ज़ है जो निचे दिया गया है:

  • चेहरे का धोना: पेशानी के बालों से जहा बाल उगने की जगह है ठोड़ी के नीचे तक एक कान की लौ से दुसरे कान की लौ तक।
  • दोनों हाथ कुहनियों समेत धोना : इस तरह धोये की कुहनियां पूरी तरह भीग जाएं।
  • चौथाई सर का मसह करना : टोपी या कुछ जो सर पर हो उसे उतार कर अपने सर के चौथाई हिस्से का मसह करना।
  • पैरों को टखनों समेत धोना : इस तरह धोये की पैर निचला हिस्सा भी ख़ुश्क न रहे और एड़िया भी अच्छी तरह धूल जाए |

वजू की सुन्नत क्या है? वुजू में कितने चीज़े सुन्नत है

wazu ki sunnat कितने होते है वजू में 4 फ़र्ज़ के अलावा जितने भी चीज़े है वह सुन्नत है:

  • नियत करना ।
  • बिस्मिल्लाह पढ़ना ।
  • पहले दोनों हाथ गट्टों तक धोना ।
  • मिस्वाक करना ।
  • तीन बार कुल्ली करना ।
  • तीन बार नाक में पानी डालना ।
  • दाढ़ी का खिलाल करना ।
  • हाथ पांव की उंगलियों का खिलाल करना ।
  • हर हिस्से को तीन बार धोना ।
  • एक बार सारे सर का मसह करना यानी भीगा हुआ हाथ फेरना ।
  • दोनों कानों का मसह करना ।
  • तरतीब से वजू करना ।
  • इस तरह से वजू करना कि पहले धोया हुआ हिस्सा सूखने से पहले दूसरा हिस्सा धो लिया जाए ।

वजू में कितने चीज़े मकरूह है

  • नापाक जगह वजू करना 
  • सीधे हाथ से नाक साफ़ करना 
  • वजू करते वक़्त दुनिया की बातें करना 
  • सुन्नत के खिलाफ वजू करना 
  • पानी ज्यादा बहाना
  • ज़ोर से चापक्के मरना 

Wazu ka Lota – वजू का लोटा

wazu ka lota
Image Source: Ebay.ie

वुजू करते समय ध्यान रखने योग्य बातें-

कुछ बातों का वुजू करते समय बहुत ध्यान रखना चाहिए, जिससे आपका वुजू न होने का खतरा बने रहता है। अगर आप इन बातों को ध्यान में रखते हुए सही तरीके से वुजू करेंगे, तब आपका वुजू सही से हो पाएगा, और नमाज़ पढ़कर खुदा आप पर महरबान होंगे।

1. गलत जगह पर वुजू करना-

कुछ लोगों के घरों में वुजू करने के लिए साफ जगह नहीं होती, या कुछ लोग जहां मर्जी किसी भी जगह पर वुजू कर लेते हैं। खासकर यह चीज बड़े शहरों में ज्यादातर देखने को मिलती है, जिसे जहां पर जगह मिली, वह वहीं पर वुजू कर लेता है।

पर ऐसा करना क़ुरान के हिसाब से सही नहीं है, वुजू एक बहुत पाक चीज है, जिसे साफ सफाई वाली जगह पर किया जाना बेहद जरूरी है। गंदी जगहों में वुजू करने से वुजू पूरे न होने का खतरा बना रहता है। इसलिए हमेशा वुजू ऐसी जगह पर करें, जहां गन्दगी न हो, या पहले उस जगह को साफ कर लें, और फिर वुजू (Wazu Karne ka Tarika) करें।

2. वुजू के समय बहुत बाते करना-

जब भी हम नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में जीते हैं, या हमारी बहनें घर पर नमाज़ पड़ती हैं, तब नमाज़ पढ़ने के लिए वुजू करते समय हम ही में से कुछ लोग एक दूसरे से इधर उधर की बहुत सारी बातें करना शुरू कर देते हैं। जो कि बिल्कुल गलत बात है, वुजू के बाद नमाज़ पढ़ी जाती है, जिसमे हम खुदा की इबादत करते हैं,

और खुदा की इबादत करते समय हमारे मन मे दुनिया की बातें न होकर केवल खुदा की इबादत होनी चाहिए, जिससे खुदा का हाथ हमारे सर पर सदा बना रहे। और वुजू करते समय इधर उधर की बातें करते समय वुजू पूरा न होने का खतरा भी बना रहता है, इसलिए जब भी वुजू करें, बिल्कुल शांत मन से करें, और इधर उधर की बातें न करें।

3. गलत तरीके से वुजू करना (सुन्नत के खिलाफ)-

हमने वुजू का तरीका समझते हुए, ऊपर कुछ सुन्नतें बताई हैं, जिनको ध्यान में रखते हुए वुजू करना चाहिए। कई बार ऐसा हो जाता है, जब हम सुन्नत के हिसाब से वुजू करना भूल जाते हैं, सुन्नत में वुजू करने (Vaju Karne ka Tarika) के लिए किसी भी चीज को तीन तीन बार धोने के लिए बताया गया है, परन्तु बहुत सी बार हमारे दिमाग मे वुजू करने समय कुछ और ही चलने के कारण हम सुन्नत के हिसाब से वुजू करना भूल जाते हैं।

पर ऐसा करने से हमारा वजू पूरा नहीं होता, और वजू पूरा नहीं होगा, तो नमाज़ भी पूरी नही हो पाएगी। इसलिए जब भी कभी हम वुजू करते हैं, तब हमें वुजू करने के लिए जो सुन्नतें हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए वुजू करना चाहिए, जिससे हमारा वजू सफल हो, और हमारी नमाज़ पढ़ने का हमे कुछ फायदा मिल सके।

4. ज्यादा पानी बर्बाद करना-

पानी को बर्बाद करना क़ुरान में बहुत गलत बताया गया है, और पानी को बर्बाद करना हमारी कायनात के लिए भी अच्छा नही है, क़ुरान में कहा गया है, और लोग भी मानते हैं कि वुजू (Wazu Banane ka Tarika) के समय पानी को बर्बाद करना वुजू न करने के बराबर है, क्योंकि पानी को बर्बाद करना एक खेल के समान है, और जब हम नमाज़ पढ़ने के लिए वुजू करते हैं,

तब हमें बहुत शांत और खुदा के प्रति समर्पित होने पड़ता है, और वुजू से पहले पानी बर्बाद करना कोई भी अच्छा व्यक्ति नहीं चाहेगा। हमे वुजू करते समय हर चीज को 3-3 बार धोना पड़ता है, और इनको धोने के लिए हमे जितने भी पानी की जरूरत हो, उतना ही पानी बर्बाद करना चाहिए, उससे ज्यादा पानी बर्बाद करना खुदा की तौहीन करने के बराबर है।

सही मात्रा में वुजू करते वक्त (Wazu ka Tarika) पानी का इस्तेमाल एक अच्छे वजू, और खुदा की दिल से इबादत की पहचान है। इसलिए वुजू के समय जितने पानी की जरूरत हो, उतना ही पानी बर्बाद करें।

5. दायाँ हाथ से नाक साफ करना-

कुछ लोगों को वजू करने का सही तरीका नहीं आता, जिससे ऐसे लोग वुजू करने में कुछ लोग दाएं हाथ का इस्तेमाल करते हैं, और यह एक बहुत गलत बात है, किताबों में भी ऐसा करना बहुत गलत बताया गया है। और बताया गया है कि नाक को साफ करने के लिए हमेशा उल्टे हाथ यानि कि बाएं हाथ का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

ऐसा करने से वुजू सही तरीके से होता है। दाएं हाथ से वुजू करते समय नाक में हाथ डालकर साफ करना पूरे शरीर को गंदा कर सकता है। सुन्नत में भी बताया गया है, कि वुजू के समय नाक को उल्टे ही हाथ से साफ किया जाना चाहिए। इस बात का खास ध्याद रखे, जिससे आपका वुजू टूटे नहीं।

इन कारणों का आपको खास ख्याल रखना है, जिससे आपका वजू अधूरा रह सकता है, या टूट सकता है। वुजू के टूटने के मुख्य कारण यही हैं।

वुज़ू टूटने के 8 कारण – Wazu Tutne ki 8 wajah in URDU

हम वुजू तो सावधानी के साथ कर लेते हैं, पर वुजू करने के बाद हम कुछ ऐसी गलतियां कर देते हैं, जिससे हमारा वुजू टूट जाता है, और हमे वापस से वुजू करना पड़ता है, वुजू टूटने के 8 कारण होते हो जो नीचे बताए गए हैं, जिन्हें आप वुजू करने के बाद ध्यान में रखेंगे, तो आपका वुजू नही टूटेगा। और आपकी नमाज़ सफल होगी।

1. अगले और पिछले प्राइवेट पार्ट से किसी चीज़ का निकलना-

अगले और पिछले प्राइवेट पार्ट से नेचुरल तरीके से किसी चीज़ का निकलना, जैसे: पेशाब, पाखाना, हवा, मणि, माज़ी, Wadi. पेशाब करते वक़्त अगले पार्ट से निकलने वाले उजला चीज़ को wadi कहते है

2. वुजू करने के बाद सहारा या टेक लगा कर सोना-

वुजू करने के बाद यह खास ध्यान रखें, की वुजू के बाद एक तरफा टेक लगाकर न सोएं, ऐसा करने से आपका वुजू टूट सकता है, और आपको वुजू दोबारा करना पड़ेगा, अगर आप ऐसे ही नमाज़ पड़ेंगे, तब आपकी नमाज़ भी अधूरी मानी जाएगी।

3. वुजू करने के बाद उल्टी आना-

अगर आप बीमार हैं, या किसी भी कारण से आपको वुजू करने के बाद उल्टी आ जाती है, तो तुरंत वुजू को दोबारा करें, अगर आप ऐसा नहीं करते और नमाज़ पढ़ने चले जाते हैं, तब यह खुदा की तौहीन कहलाएगी। और नमाज़ का कोई फायदा आपको नही मिल सकेगा। इस बात का खास ध्यान रखें।

4. शरीर के किसी भी हिस्से से पीप या खून निकलना-

यदि आपके कहीं चोट लगी है, या कही पर मस्सा बना हुआ है, और आपके वुजू करने के बाद उसमें से खून या पिप निकल रहा है, तब आप खून को या पिप को अच्छी तरह साफ करें, और फिर से वुजू करें। नहीं तो आपकी नमाज़ पूरी नहीं मानी जाएगी, और खुदा की तौहीन मानी जाएगी।

5. वुजू करने के बाद बाथरूम जाना-

इस बात का सभी को ध्यान रखना चाहिए कि वुजू करने से पहले बाथरूम होकर आना चाहिए, वुजू के बाद बाथरूम (गुसल) जाने से वुजू टूट जाता है, और आपको वुजू दोबारा से करना पड़ता है। कभी भी वुजू करने से पहले गुसल जाएं।

6. किसी भी कारण से बेहोश हो जाना-

अगर आपने वुजू कर लिया है, और आपको किसी प्रकार का चक्कर आ जाए, और आप बेहोश हो जाएं, तो ऐसे हालात में वुजू नही माना जाता है, ऐसे हालत में पहले कहीं बैठकर आराम कर लें, अगर आप समय पर ठीक हो जाते हैं, तब दोबारा वुजू करके नमाज़ पढ़ें।

7. नमाज़ के दौरान जोर जोर से हँसना या मुस्कुराना-

यह वुजू टूटने का सबसे बड़ा कारण है, लोग जब वुजू करने के बाद नमाज़ पढ़ने जाते हैं, तब उनको किसी भी कारण से हस्सी आ जाता है, या वे मुस्कुरा जाते हैं, ऐसा करना नमाज़ और खुदा दोनों का अपमान है।

इसलिए इस बात का खास ख्याल रखें, जब भी आप वुजू करके नमाज़ पढ़ने आएं, आपका मन और दिमाग शांत हो। और आप हँसे नहीं। इससे आपका वुजू और नमाज़ दोनों ही सफल होंगे, और खुदा का हाथ आप पर सदा बना रहेगा।

8. प्राइवेट पार्ट का प्राइवेट से मिलाना

मुबशारते फाहिशा, यानि बिला किसी परदे या रुकावट के प्राइवेट पार्ट का प्राइवेट से मिलाना, चाहे मर्द का औरत से हो, या मर्द का मर्द से, या औरत का औरत से।

इन बातों का आपको ध्यान में रखना बहुत जरूरी है, क्योकि वुजू करने के बाद आपका मन और शरीर दोनों साफ हो जाते हैं, और अगर आप ऊपर दिए गए कारणों में से कुछ भी गलती से या जानबूझकर करते हैं, तो आपका वुजू टूटने का खतरा बना रहेगा, या टूट जाएगा।

Wazu karne ka tarika video download

wazu banane ka tarika hindi me अगर आप वजू का तरीका हिंदी में और विडियो को देखकर तो आप निचे दिया हुआ विडियो देख कर अच्छी तरह से सीख सकते हो

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हमेशा बा वुजू रहने वाले को कौन सी सात फ़ज़ीलतें मिलती हैं ? 

 हमेशा बा वुजू रहने वाले को यह सात फ़ज़ीलतें मिलती हैं ? 

  • मलाइका उस की सोहबत में रगबत करें ।
  • कलम उस की नेकियां लिखता रहे । 
  • उस के आ’ज़ा तस्बीह करें ।
  • उस से तक्बीरे ऊला फ़ौत न हो ।
  • जब सोए अल्लाह तआला कुछ फ़िरिश्ते भेजे कि जिन्नो इन्स के शर से उस की हिफाज़त करें ।
  • सकराते मौत उस पर आसान हो ।
  • जब तक वुजू हो अमाने इलाही में रहे । ( फतावा रज्विया 1 / 703 ) 

तहियातुल वजू का तरीका – Tahiyatul wazu ka tarika

Tahiyatul wudu ki Fazilat

एक हदीस में जो इरशाद है कि जो कोई मुसलमान वज़ू करें और अच्छी तरह से सुन्नतों का ख्याल रखते हुए पानी खूब ध्यान से सब जगह पहुंचाएं फ़िर खड़े होकर इसी तरह 2 रकात नमाज पढ़े खूब दिल लगा कर अल्लाह की तरफ मुतावज्जो रहे तो उसके लिए जन्नत वाजिब होगी।

मालूम हुआ कि वजू के बाद 2 रकात नमाज़ खूब दिल लगा कर पढने से ज्यादा सवाब मिलता है अगर कुछ फुकहा ने यह भी लिखा है कि वज़ू के बाद सुन्नत फर्ज पढ़ ले उससे भी Tahiyatul wudu का सवाब मिल जाएगा जैसे tahiyatul masjid का सवाब इस तरह मिल जाता है। पढ़ने से पहले यह देख ले कि वक्त नहीं है जवाल के वक्त नमाज पढ़ना दुरुस्त नहीं है और सुबह सादिक होने के बाद सूरज निकल कर बुलंद हो जाने तक पढ़ना दुरुस्त नहीं है इन वक्तो में tahiytul wudu ना पढ़े कुछ फुकहा ने लिखा है कि वज़ू का पानी हाथ पैर से सूखने से पहले tahiyatul wudu पढ़ ले इसका ख्याल भी रखना बेहतर है।

नबी अकरम सल्लल्लाहो सल्लम ने ख्वाब में हजरत बिलाल रजि अल्लाहु ताला अन्हू के जूतों की आहट अपनी आगे जन्नत में सुनी, क्योंकि हजरत बिलाल रजि अल्लाह ताला आप सल्ला वाले वसल्लम के साथ रहते थे और कई जरूरी काम को अंजाम देने के लिए आगे आगे चला करते थे इसमें हजरत बिलाल रजि अल्लाह ताला अनु के जन्नती होने की और इस काम की बशारत है कि वह जिस तरह दुनिया में हुजूर अकरम सल्लल्लाहो वसल्लम के रहने वाले थे और उनके करीब थे इसी तरह जन्नत में भी अल्लाह के रसूल का खास बनना नसीब होगा क्योंकि नबियों का ख्वाब वही होता है इसलिए इस अजीब खुशखबरी के होने में कोई शक नहीं।

कुछ रिवायत में है कि जब हजरत बिलाल रजि अल्लाहु ताला अनहु ने बताया कि सबसे ज्यादा अल्लाह की रजा की उम्मीद वाला अमल यह है कि जब मैं वजू करता हूं और उसके बाद tahiyatul wudu की नमाज़ पढ़ता हूं तो उस वक्त अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वाले वसल्लम ने इरशाद फरमाया यानी इस अमल की वजह से तुम को यह फजीलत हासिल हुई क्योंकि यह फजीलत का खास काम है यानी हर वजू के बाद नमाज के कायम करने से मिली है इसलिए सब हजरात को यह अमल अख्तियार करना चाहिए।

Wazu Related Questions (FAQs)

किसी हिस्सा को धोने के क्या मतलब हैं ? 

Wazu में किसी हिस्सा के धोने के यह मतलब हैं कि उस हिस्सा के हर हिस्से पर कम से कम दो बूंद पानी बह जाए। भीग जाने या तेल की तरह पानी चुपड़ लेने या एक आध बूंद बह जाने को धोना नहीं कहेंगे न इस से वजू या गुस्ल अदा होगा। मतलब जिस जगह धोए पूरी अच्छी तरह से खुश्क यानि नम हो जाए।

क्या हाथ या बदन से खून निकलने से वजू टूट जाता है ?

आपके बॉडी से खून निकला मगर खून अपनी जगह से बहा नहीं तो wazu नहीं टूटता है अगर खून बहा मगर बह कर ऐसी जगह नहीं पहुंचा जिस का वजू़ या गुस्ल में धोना फ़र्ज़ हो मसलन खून निकल कर आंख या कान में बहा मगर इन से बाहर नहीं आया तो वजू़ नहीं टूटा ।

क्या इन्जिक्शन (Injection) लगाने से वजू़ टूट जाता है ?

गोश्त में इन्जिक्शन (Injection) लगाने में सिर्फ उसी सूरत में वजू़ टूटेगा जब कि बहने की मिक्दार में खून निकले । नस का इन्जिक्शन (Injection) लगा कर पहले ऊपर की तरफ़ खून (Blood,) खींचते हैं जो कि बहने की मिक्दार में होता है लिहाजा वजू़ टूट जाता है यूंही सीरेंज के जरीए टेस्ट (Test) करने के लिये खून (Blood)निकालने से वजू़ टूट जाता है क्यूंकि यह बहने की मिक्दार में होता है ।

क्या हर नमाज़ से पहले वुज़ू करना ज़रूरी है?

जरुरी नहीं। अगर नमाज़ के बीच बाथरूम जाना या सोना नहीं होता है तो आपका wazu टूटता नहीं है तो आप फिर से वुज़ू किए बिना नमाज़ पढ़ सकते हैं।

दिन में कितनी बार वुज़ू करना ज़रूरी है?

वुज़ू करने की कोई fixed संख्या नहीं है। जब आप नमाज़ और कुरान पढ़ते हैं तो आपको वुज़ू की ज़रूरत होती है। हर बार जब आप नमाज़ पढ़ते हैं तो वुज़ू करने की सलाह दी जाती है, लेकिन आपको ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है। जब तक आपकी वजू बाकि है तब तक वजू की कोई जरुरत नहीं है।

क्या बगैर वजू कुरान पढना कैसा है?

बगैर wazu के कुरान शरीफ को पढ़ सकते हो लेकिन बगैर wazu के कुरान को छूना मना है क्युकी नमाज़ और तवाफ़ के लिए ही wazu फ़र्ज़ है बाकि चीजों के लिए सुन्नत है, मगर wazu करने कुरान पढ़ रहे है तो आपको बगैर wazu से ज्यादा सवाब मिलता है।

Conclusion – Wazu ka Sahi Tarika in Hindi

आज आपने जाना वुजू करने का सही तरीका (Wazu ka Tarika in Hindi), वुजू की नीयत (Wazu ki Niyat), वुजू की दुआ (Wazu ki Dua). और साथ ही में जाने कुछ ऐसे कारण जिनसे हमारा वुजू टूट जाता है। आशा करते हैं आपको आज की यह पोस्ट पसन्द आई होगी।

 

 

How to Perform Wudhu – A Step-by-Step Guide for Beginners



Islam is a religion that emphasizes cleanliness. The Prophet s.a.w. stressed the importance of hygiene and cleanliness in many parts of his sirah (life). Even though Prophet Muhammad s.a.w. preferred a modest and simple lifestyle, it did not mean that he wore torn-off and unclean clothes. He was always clean, as seen in many narrations by the companions r.a. Allah s.w.t. commanded the Prophet s.a.w. to upkeep his cleanliness, as mentioned in the Quran:

وَثِيَابَكَ فَطَهِّرْ

"Purify your garments"

(Surah Al-Muddaththir, 74:4) 

Prophet Muhammad s.a.w. showed us how purification, or taharah, plays an important role in our religion, both inwardly and outwardly as well. Every outward form of purification is also an opportunity for spiritual fulfilment to purify the inward self. Prophet Muhammad s.a.w. said in a hadith:

الطَّهُورُ شَطْرُ الإِيمَان

"Purity is part of Iman (faith)"

(Sahih Muslim)

We can see from this hadith how purification is closely associated with the completion of faith. There are many different forms of ritual purification in Islam, amongst which is wudhu, or ablution, which will be our focus of discussion for this article. 

 What is wudhu?

The word wudhu comes from the Arabic word وَضَاءَة (Wadho’ah), which means good and beautiful. 

Wudhu, by terminology, means the act of ritual washing of specific parts of our body in a specific way to remove the ritual impurities. Although wudhu itself is a type of worship which entails certain rewards, wudhu can also be seen as a prerequisite to performing other ritual acts of worship, such as performing the tawaf (circling of the ka’bah) for umrah and hajj, holding the mushaf (Quran) and, most importantly, performing our five daily prayers. Allah s.w.t. says in the Quran:

يَـٰٓأَيُّهَا ٱلَّذِينَ ءَامَنُوٓا۟ إِذَا قُمْتُمْ إِلَى ٱلصَّلَوٰةِ فَٱغْسِلُوا۟ وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى ٱلْمَرَافِقِ وَٱمْسَحُوا۟ بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى ٱلْكَعْبَيْنِۚ

"O believers! When you rise for prayer, wash your faces and your hands up to the elbows, wipe your heads and wash your feet to the ankles"

(Surah Al-Maidah, 5:6)

 

 

What are the significance and benefits of taking wudhu?

Beyond being a prerequisite for other acts of worship, there are, indeed, many benefits of taking wudhu as an act of worship itself:

1. Removing sins and impurities 

As mentioned in a hadith narrated by Sayyidina Uthman ibn ‘Affan r.a:

مَن تَوَضَّأَ فأحْسَنَ الوُضُوءَ خَرَجَتْ خَطَايَاهُ مِن جَسَدِهِ، حتَّى تَخْرُجَ مِن تَحْتِ أَظْفَارِهِ

"If anyone performs the ablution well, his sins will come out from his body, even coming out from under his nails."

(Sahih Muslim)

This hadith shows that every wudhu we take is an opportunity not only to remove physical impurities but our sins as well.

The mercy and forgiveness of Allah s.w.t. do not only stop there. In another hadith narrated by Abu Hurairah r.a, wudhu is part of an ecology of ritual practice that leads to the removal of sins and elevation in status. Prophet Muhammad s.a.w. said:

مَنْ تَطَهَّرَ فِي بَيْتِهِ ثُمَّ مَشَى إِلَى بَيْتٍ مِنْ بُيُوتِ اللَّهِ لِيَقْضِيَ فَرِيضَةً مِنْ فَرَائِضِ اللَّهِ كَانَتْ خَطْوَتَاهُ إِحْدَاهُمَا تَحُطُّ خَطِيئَةً وَالأُخْرَى تَرْفَعُ دَرَجَةً

"He who purified himself (performs wudhu) in his house and then he walked to one of the houses of Allah (mosque) for the sake of performing an obligatory act (i.e. solat), both his steps (would be significant) as one of them would remove his sin and the second one would raise his status."

(Sahih Muslim)

Even though it specifically mentions taking wudhu at home, you may also take wudhu from your workplace, school or anywhere else you may come from before walking over to the mosque. The term Faridhah (obligatory act) in this hadith refers to acts of worship, particularly the daily obligatory prayers or the Friday prayers at mosques. 

2. Attaining Allah’s love

Allah s.w.t. mentions in the holy Quran:

إِنَّ ٱللَّهَ يُحِبُّ ٱلتَّوَّٰبِينَ وَيُحِبُّ ٱلْمُتَطَهِّرِينَ

"Verily Allah loves those who (constantly) turn to Him in repentance and those who purify themselves."

(Surah Al-Baqarah, 2:222)

This is why we are encouraged to constantly maintain our state of wudhu. If we do so, we could hope to continue to be showered by His divine love.

In a hadith, Prophet Muhammad s.a.w. shared about the condition of a person who maintains his state of wudhu while waiting for the next prayer to come:

أَلا أدُلُّكُمْ علَى ما يَمْحُو اللَّهُ به الخَطايا، ويَرْفَعُ به الدَّرَجاتِ؟ قالُوا بَلَى يا رَسولَ اللهِ، قالَ: إسْباغُ الوُضُوءِ علَى المَكارِهِ، وكَثْرَةُ الخُطا إلى المَساجِدِ، وانْتِظارُ الصَّلاةِ بَعْدَ الصَّلاةِ، فَذَلِكُمُ الرِّباطُ

"Shall I not tell you something that removes sins and elevates the position (in the sight of Allah)? The companions replied: yes, O Rasulullah. He said: Performing wudhu properly despite difficult circumstances, walking abundantly to the mosques, and waiting for the next solat after performing solat, and that is Ar-Ribat (one who is continuously in the state of worship)"

(Sahih Muslim)

This hadith also shows how important it is to safeguard the state of wudhu to allow us to perform many other acts of worship.

3. Attaining illumination on the Day of Resurrection

Taking wudhu will not only leave you physically clean, but it will also leave spiritual marks as well. This mark will be revealed or shown on the Day of Judgment. In a hadith, the Prophet s.a.w. mentioned:

إنَّ أُمَّتي يُدْعَوْنَ يَومَ القِيامَةِ غُرًّا مُحَجَّلِينَ مِن آثارِ الوُضُوءِ، فَمَنِ اسْتَطاعَ مِنكُم أنْ يُطِيلَ غُرَّتَهُ فَلْيَفْعَلْ.

"Verily, my people will be called upon on the Day of Resurrection with a mark which illuminates their faces by the effects of their wudhu. So whoever is able to extend their mark (of illumination), let him do so."

(Sahih Al-Bukhari)

Just like other acts of worship, there are indeed many benefits to taking wudhu. Ultimately, it is an act of worship to seek the pleasures of Allah s.w.t.

How to perform wudhu

According to Syafii mazhab, here are the steps mentioned in the correct order:

1. Ensure that you are free from any impurities

If you are wearing makeup, nail polish or other products that prevent water from reaching the skin, you will need to remove them to allow water to reach your skin as you wash the intended areas for wudhu.

2. Establishing your niyyat (intention) 

There is no need to utter your intention verbally. What’s important is that the intent of performing the wudhu - to remove the ritual impurities, or to observe wudhu - is established in the heart. This intention has to be made from washing the face.

3. Wash the face

Rinse the face with water, making sure to wash from the hairline to the chin and from ear to ear, including sideburns.

For a gentleman with a beard, the way of washing depends on his beard’s volume. If he stands in front of a mirror and he can see his skin through his beard, his beard is considered light, and he may wash his face as any other person would. However, if his beard is thick enough that the skin under it is no longer visible, he will need to apply water to his beard.

4. Wash both arms until the elbow

Rinse the arms till just past the elbows.

It is sunnah to start washing the right arm first before you move on to the left arm. This act of washing from the right before washing the left (tayamun) also applies to the feet as well. Prophet Muhammad s.a.w. said in a hadith:

وإذا توضَّأتُمْ، فابدَؤوا بأيامنِكُم

"When you perform your wudhu, begin with your right side."

(Sunan Abi Daud)

5. Wipe the head

According to the Syafii mazhab, you can wipe your head by using your hands to wet some strands of hair or a part of your scalp for those who are bald to fulfil the requirement. However, it is best to wipe all of your head. According to the Syafii mazhab, it is sunnah to include your ears as you wipe over the entire head. 

From the mentioned requirement, we can deduce that if you intend to maintain your hair after styling it, you may wipe it towards the sides of your head just above or behind your ears. Likewise, for those wearing the tudung/hijab and taking the wudhu outside, there is no need to take off your tudung/hijab. You may tuck in your damp hand inside of your tudung inner and wipe it, reaching the hairs within the scalp area.

As for those who may have long hair, do not wipe water at the edge of your hair, especially when it extends beyond your head area. Instead, wipe near the scalp of your head.

6. Wipe the ears

This step is not an integral step (rukun) of wudhu. Instead, it is a sunnah. Wipe both ears at the same time. There is no need to wipe the right first before the left ear (tayamun). Wiping the ears includes the front (including the crevices) and back.

7. Wash the feet until the ankle

When washing the feet, it goes from going between the toes up to the ankle and briefly past it. It is sunnah to rub, ensuring that water has reached all the mentioned areas.

Must the steps of wudhu be done in the specific order above?

The last integral (rukun) of wudhu is to observe all the steps in the mentioned order. 

It is not permissible and is considered invalid if we were to take our wudhu differently from the order mentioned above. For example, if a person were to start by wiping the head first before washing the face, the wudhu is considered invalid.

However, there is only one exception to this. If a person’s entire body is submerged in water and he or she establishes the intention for wudhu, the wudhu is valid. This is the view held on by Imam An-Nawawi.

Tips on taking wudhu in a public area (i.e. public toilet)

There are instances when we may need to perform our wudhu in a public toilet. Here are some reminders and tips to help ease the process:

1. We should not make a mess when taking the wudhu in a public toilet. Be conscious of our environment and do not make a mess of the area where we are taking the wudhu.

2. Bring along a small towel and a small bottle to help ease each step when in a public toilet.

3. When you reach the part of washing the legs, you don't have to lift your legs to the sink. Instead, you may take just enough water and rub it over your feet until the ankle. Alternatively, you may fill your small bottle with water, shift to a cubicle and wash your feet over the toilet bowl so as not to wet the floor.

Once you are done taking the wudhu, clean up after yourself. Ensure that the area you’ve used is not too wet and messy. If it is, do take some toilet paper to wipe dry the area. Also, dry yourself down with a small towel to prevent water from dripping all over the place. 

Let us be mindful of other patrons and cleaners as we try our best to be socially responsible Muslims. 

Sunnah of wudhu

As with other acts of worship, wudhu also has sunnah or supplementary deeds that can be done on top of the obligatory ones. 

Read: MuslimSG | Understanding the Sunnah of the Prophet s.a.w.

We can categorise them into three categories: Before, During, and After.

Before wudhu

1. Recite the Ta’awwuz and Basmalah

It is always best to recite the Ta’awwuz and the Basmalah before starting anything. It applies to wudhu too. How we recite it as follows:

أَعْوذْ بِاللهِ مِنَ الشَّيطَانِ الرَّجِيمِ

A’uzubillahi Minash-shaitonirrajim

I seek refuge in Allah from the accursed Syaitan

بِسمِ اللهِ الرَّحمَنِ الرَّحِيمِ

Bismillahir-Rahmanir-Rahim

In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful

If you’re taking your wudhu in the toilet, do refrain from verbally reciting the name of Allah. Instead, you may recite in your heart. 

2. Wash your hands

It is a sunnah to wash both hands before performing wudhu

Our hands come into contact with germs on surfaces during daily activities. As Islam puts a strong emphasis on cleanliness, you may also wash your hands with soap to ensure that they are thoroughly clean before proceeding to wudhu.

3. Clean your teeth

The Prophet s.a.w. used to clean his teeth upon making the wudhu. He would use the miswak (also known as the siwak), which has many natural benefits, such as removing dental plaque and improving periodontal health over time.[1] The miswak is highly regarded by the Prophet s.a.w and was even mentioned in a hadith

لولا أن أَشُقَّ على أمتي لأمرتُهم بالسواكِ مع الوُضوءِ‏

"Had I not thought it difficult for my people, I would have commanded them to use the miswak with (every) wudhu"

(Musnad Ahmad)

But if you do not have a miswak, you may also use a normal toothbrush in hopes to fulfil the sunnah of cleaning the teeth before making wudhu.

4. Gargling and rinsing of the nose

Our scholars have informed us of the different ways to observe this sunnah. Amongst these is by gargling three times and then rinsing the nose three times by inhaling a bit of water and then blowing it out.

During wudhu

1. Conserve water

When doing the wudhu, it is highly recommended to use minimum water to avoid being wasteful. The Prophet s.a.w. mentioned in a hadith about being mindful of the usage of water in wudhu:

أنَّ النَّبيَّ صلَّى اللَّهُ عليهِ وسلَّمَ مرَّ بسَعدٍ وَهوَ يتوضَّأُ، فقالَ: ما هذا السَّرَفُ يا سَعدُ ؟ قالَ: أفي الوضوءِ سَرفٌ قالَ: نعَم، وإن كنتَ على نَهْرٍ جارٍ

"The Prophet s.a.w. passed by Sa’d when he was making the wudhu. and (the Prophet) said: “What is this (act of) wasting?”. He (Sa’d) asked, “Is there extravagance in (performing) wudhu?” The Prophet replied, “Yes, even if you were on the banks of a flowing river."

(Sunan Ibn Majah)

2. Rub the body parts

It is a sunnah to rub (الدلك) the body parts when doing the wudhu to ensure that water reaches all the intended areas. This is particularly for washing the face, the arm until the elbow and the feet until the ankle.

It is also a sunnah to interweave your fingers together when washing your arm and between the toes when washing the feet.

3. Repeat each step three times

It is a sunnah to repeat each step of wudhu three times. As mentioned by Sayyidina Uthman ibn ‘Affan r.a:

أَلَا أُرِيكُمْ وُضُوءَ رَسُولِ اللَّهِ صَلَّى اللَّهُ عَلَيْهِ وَسَلَّمَ ثُمَّ تَوَضَّأَ ثَلَاثًا ثَلَاثًا

"Shall I not show you the wudhu of Rasulullah s.a.w? Then he did wudhu, washing each part three times."

(Sahih Muslim)

After wudhu

After taking the wudhu, you may perform the following sunnah acts:

1. Read supplication after wudhu

After finishing all the steps and observing some of the sunnah of wudhu, make the supplication:

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَهَ إلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّداً عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ، اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ وَاجْعَلْنِي مِنْ عِبَادِكَ الصَّالِحِين

Ashadu an laa ilaaha illAllah wahdahu la sharika lah, wa ashadu anna muhammadan ‘abduhu wa rasuluh

Allahummaj’alni minat-tawwabina, waj’alni minal mutathohhirin, waj’alni min ‘ibadikas-solihin

I testify that there is no god but Allah, the One, there is no associate with Him and I testify that Muhammad is His servant and His Messenger. O Allah! Make me among those who (constantly) repent, and among those who (constantly) purify themselves, and among your righteous servants

In a hadith narrated by Sayyidina Umar Ibn Al-Khattab r.a, the Prophet s.a.w. mentioned the significance of making the prayer after wudhu:

ما مِن مُسلمٍ يتَوضَّأُ فيُحسِنُ الوضوءَ ثمَّ يقولُ أشهدُ أن لا إلهَ إلَّا اللهُ وأشهدُ أنَّ محمَّدًا عبدُه ورَسولُه إلَّا فُتِحتْ لهُ ثمانيةُ أبوابِ الجنَّةِ يدخُلُ مِن أيِّها شاءَ

"Every Muslim who performs wudhu carefully and then supplicates - I testify that there is no god except Allah Alone, Who has no partners, and that Muhammad is His servant and Messenger - the eight gates of Paradise are opened for him. He may enter through whichever of these gates he desires."

(Sahih Muslim)

If you have made your wudhu in a toilet, then it is best to make the supplication after stepping out of the toilet. According to the Syafii mazhab, it is sunnah to face the qiblah and raise your hands in making the supplication.


2. Pray two raka’at of Sunnah prayer

 

 

After making your supplication, you may perform two raka’at of sunnah prayer. In a hadith, Prophet Muhammad s.a.w. said:

مَنْ تَوَضَّأَ نَحْوَ وُضُوئِي هَذَا، ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ، لاَ يُحَدِّثُ فِيهِمَا نَفْسَهُ، غُفِرَ لَهُ مَا تَقَدَّمَ مِنْ ذَنْبِهِ

"He who performs ablution like this ablution of mine and then stood up (for prayer) and offered two raka'at of prayer without allowing his thoughts to be distracted, all his previous sins are expiated"

(Sahih Muslim)

In another hadith, Prophet Muhammad s.a.w. returned from his night journey (isra mi’raj) where he heard the footsteps of Bilal in Paradise. He then asked Bilal r.a. during the time of a Subuh prayer: 

 يا بلَالُ، حَدِّثْنِي بأَرْجَى عَمَلٍ عَمِلْتَهُ في الإسْلَامِ؛ فإنِّي سَمِعْتُ دَفَّ نَعْلَيْكَ بيْنَ يَدَيَّ في الجَنَّةِ. قالَ: ما عَمِلْتُ عَمَلًا أَرْجَى عِندِي: أَنِّي لَمْ أَتَطَهَّرْ طُهُورًا، في سَاعَةِ لَيْلٍ أَوْ نَهَارٍ، إلَّا صَلَّيْتُ بذلكَ الطُّهُورِ ما كُتِبَ لي أَنْ أُصَلِّيَ

"O Bilal, tell me of the best deed you did after embracing Islam, for I heard your footsteps in front of me in Paradise." Bilal replied, "I did not do anything worth mentioning except that whenever I performed my ablution during the day or night, I prayed after that ablution as much as what was written for me."

(Sahih Al-Bukhari)


What nullifies or breaks the state of wudhu?

As stated earlier in this article, maintaining the state of wudhu is a virtuous act in Islam. While there is nothing wrong with breaking our wudhu, it's important to know what factors can nullify it. 

Here are the four main things that can break the state of wudhu:

1. Anything that exits from the front or rear private parts

If any kinds of excrement were to exit the front and rear private parts, such as urinating, defecating, or even farting, it would invalidate the state of wudhu

However, being in contact with faeces per se does not invalidate wudhu. For example, if a person may have stepped upon human faeces, it does not break his or her state of wudhu. Nevertheless, because it is considered filth (Najasah), we will need to remove and clean it first before performing other acts of worship, such as solat.

2. Being in an unconscious state

Being unconscious can invalidate your wudhu. This includes fainting, having seizures, or even sleeping. 
There are two exceptions to sleep, which do not invalidate the state of wudhu:

a. If a person only dozes off, it does not count as sleep. A sign of dozing off is such that the person will still be able to hear sounds or the conversations of the people around them, even if they may not understand them.

b. The position of sleep is an upright sitting position. Anyone who sleeps in this position will be able to feel or be conscious of any air exiting the rear.

3. Skin contact with an adult non-mahram of the opposite gender

Be it intentional or unintentional, skin contact with the opposite gender of a non-mahram will nullify your wudhu

But what is mahram? A mahram means a person you are not allowed to marry (unmarriageable kin). i.e. your father, brother, or grandfather. Non-mahrams are those you are allowed to marry. Hence, according to the Syafii mazhab, skin contact with your spouse can also invalidate the wudhu.

From the above, it also means that non-skin contact does not invalidate the wudhu. For example, if there is cloth or even a tissue in between, the contact does not invalidate wudhu. Another example of non-skin contact is such as being in contact with the teeth, nails or hair of the other non-mahram.

Additionally, being in contact with a child below the age of maturity (bulugh), such as shaking their hands, does not invalidate the wudhu.

4. Touching of the private parts

Touching the front and rear human private parts, intentionally or unintentionally, with the palm of our hand will invalidate our wudhu. In a hadith, the Prophet s.a.w mentioned:

مَنْ مَسَّ ذَكَرَه، فَلَا يُصَلِّي حَتَّى يَتَوَضَّأَ

"Whoever touches his genitals should not perform solat until he performs wudhu."

(Sunan An-Nasai)

Special circumstances for taking wudhu

 

 

The above steps of performing wudhu are for general conditions. However, there are some unique circumstances which require adjustments, such as:

-  experiencing an illness that does not allow contact with water

-  travelling to a place where water is not easily accessible

These are specific situations which impede a person from performing wudhu under normal circumstances. 

To understand these unique situations and how we can perform wudhu in such conditions, look out for relevant classes from ADIL modules such as the following:

 Fardhu Ain

 Fiqh for the sick

-  Traveller’s Fiqh 


As a final note, for those who may have just started to learn how to take wudhu, do not despair. It only gets easier every time we fulfil it. Wudhu is considered an ‘ibadah (worship), and every movement or step we take in wudhu is an opportunity to be closer to Allah s.w.t.

And Allah s.w.t knows best.

 

 


 

 

 

 

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